प्रयागराज:- महाकुंभ नगरी

प्रयागराज: आस्था, इतिहास और संस्कृति का संगम है।

प्रयागराज भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्राचीनतम, पवित्र और ऐतिहासिक शहर है।  इसे पहले इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था, किंतु वर्ष 2018 में इसका प्राचीन नाम “प्रयागराज” पुनः कर दिया गया। यह नगर  हमेशा से भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक चेतना का प्रमुख केंद्र रहा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण प्रयागराज को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। इसे “तीर्थराज” अर्थात् सभी तीर्थों का राजा भी कहा जाता है।

महाकुंभ प्रयागराज

प्रयागराज का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों—वेदों, पुराणों और महाकाव्यों—में मिलता है। मान्यता है कि सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा जी ने यहाँ पहला यज्ञ किया था, इसलिए इसे “प्रयाग” कहा गया। “प्रयाग” का अर्थ है—यज्ञ का स्थान। कालांतर में यह क्षेत्र धार्मिक यात्राओं का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ स्नान और दर्शन के लिए आते हैं।

प्रयागराज की सबसे बड़ी पहचान त्रिवेणी संगम है, जहाँ गंगा और यमुना नदियाँ मिलती हैं तथा मान्यता है कि सरस्वती नदी भी अदृश्य रूप से यहाँ प्रवाहित होती है। संगम में स्नान करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है—ऐसी धार्मिक धारणा है। इसी कारण यहाँ कुंभ मेला, अर्धकुंभ और माघ मेला जैसे विशाल धार्मिक आयोजन होते हैं। कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु एकत्र होते हैं। यह आयोजन प्रयागराज को वैश्विक पहचान दिलाता है।

इतिहास की दृष्टि से भी प्रयागराज अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मुगल सम्राट अकबर ने 1583 ई. में यहाँ एक विशाल किले का निर्माण कराया, जिसे आज इलाहाबाद किला कहा जाता है। यह किला यमुना नदी के किनारे स्थित है और मुगल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी किले के भीतर अशोक स्तंभ भी स्थित है, जिस पर मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेख अंकित हैं। यह स्तंभ प्रयागराज की प्राचीनता और ऐतिहासिक निरंतरता का साक्ष्य है।

ब्रिटिश काल में प्रयागराज प्रशासनिक और शैक्षिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगर बन गया। वर्ष 1887 में स्थापित इलाहाबाद उच्च न्यायालय (अब प्रयागराज उच्च न्यायालय) भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में से एक है। इसके अलावा 1887 में ही स्थापित इलाहाबाद विश्वविद्यालय को “पूरब का ऑक्सफोर्ड” कहा जाता था। इस विश्वविद्यालय ने देश को अनेक विद्वान, लेखक, वैज्ञानिक और राजनेता दिए हैं।

प्रयागराज स्वतंत्रता आंदोलन का भी एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ से कई राष्ट्रीय आंदोलन संचालित हुए। आनंद भवन और स्वराज भवन जैसे स्थल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर हैं। ये स्थान नेहरू परिवार से जुड़े रहे हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू, जो भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, का प्रयागराज से गहरा संबंध रहा है। आनंद भवन आज एक संग्रहालय के रूप में संरक्षित है, जहाँ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी अनेक स्मृतियाँ संजोई गई हैं।

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भी प्रयागराज का विशेष स्थान है। यह नगर हिंदी साहित्य का एक प्रमुख केंद्र रहा है। महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत जैसे महान साहित्यकारों ने यहाँ रहकर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। आज भी प्रयागराज की साहित्यिक परंपरा जीवंत है और यहाँ अनेक साहित्यिक आयोजन होते रहते हैं।

प्रयागराज की सांस्कृतिक विविधता इसकी एक और विशेषता है। यहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं और परंपराओं के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। त्योहारों के समय यह नगर विशेष रूप से जीवंत हो उठता है। माघ मेला, दीपावली, होली, ईद और क्रिसमस जैसे पर्व यहाँ समान उत्साह से मनाए जाते हैं। संगम पर दीपदान और गंगा आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है।

श्री बड़े हनुमान जी मन्दिर प्रयागराज 🙏

आधुनिक प्रयागराज तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। बेहतर सड़कें, रेलवे जंक्शन, हवाई अड्डा और शैक्षिक संस्थान इसे एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र बनाते हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत नगर के बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा रहा है, जिससे यह शहर परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संतुलन प्रस्तुत करता है।

यहां श्री लेटे हुए हनुमान जी बहुत प्रसिद्ध हैं।http://Prayagraj Mahakumbh Nagri

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